गतिविधियाँ

  • प्रदेश के ऐसे मंदिर जिनके संबंध में भू-अभिलेख में भूमि-स्वामी के रूप में मंदिर की मूर्ति का नाम दर्ज है, उन मंदिरों को शासन संधारित मंदिर की श्रेणी में रखते हुए कलेक्टर को भू-अभिलेख में प्रबंधक के रूप में दर्ज किया जाता है। ऐसे शासन संधारित मंदिरों की व्यवस्था का उत्तरदायित्व शासन पर है। मध्य प्रदेश के 31 जिलों में लगभग 12000 ऐसे मंदिर है। मुख्यत: इन मंदिरों की व्यवस्था के लिए उनका जीर्णोद्वार उनमें कार्यरत पुजारियों का मानदेय तथा धर्मशाला निर्माण का उत्तरदायित्व शासन पर रहता हैं। यह कार्य कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी ;राजस्व एवं तहसीलदारों के माध्यम से कराया जाता है। भोपाल, रायसेन तथा सीहोर जिले में सिथत मंदिरों की व्यवस्था के लिए एक मंदिर समिति गठित है, जिनके अध्यक्ष आयुक्त, भोपाल संभाग रहते है, इन तीनो जिलो के मंदिरों के लिए वर्ष 2008-2009 के बजट में 44.00 लाख रूपये का प्रावधान है।
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  • इनससमज न्यासो की व्यवस्था लोक न्यास अधिनियम, 1951 के तहत की जाती है, अधिनियम के अनुसार कलेक्टर, पंजीयक न्यास है, परन्तु अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को यह अधिकार प्रदत्त किये गये है। इन न्यासों के संबंध में शिकायतों पर कार्यवाही करने के लिए कलेक्टर सक्षम है।
  • इनससमज प्रदेश के ऐसे मंदिर जिनका ऐतिहासिक अथवा धार्मिक या दोनों प्रकार का विशेष महत्व है, उनके लिए विशेष कानूनी व्यवस्था कायम की गर्इ है, जो निम्नानुसार है :-
    • महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन के लिए मध्य प्रदेश श्री महाकालेश्वर अधिनियम, 1982।
    • सलकनपुर देवी मंदिर, जिला-सीहोर के लिए सलकनपुर देवी अधिनियम, 1956।
    • मां शारदा मंदिर, मैहर, जिला-सतना के लिये मां शारदा देवी मंदिर अधिनियम, 2002।
    • मध्य प्रदेश श्री गणपति खजराना इन्दौर अधिनियम, 2003।